mother

हे मेरे पुत्र, मेरी आज्ञा को मान, और अपनी माता की शिक्षा का न तज।

नीतिवचन 6 : 20

बूढ़ों की शोभा उनके नाती पोते हैं; और बाल-बच्चों की शोभा उनके माता-पिता हैं।

नीतिवचन 17 : 6

अपने जन्माने वाले की सुनना, और जब तेरी माता बुढिय़ा हो जाए, तब भी उसे तुच्छ न जानना।

नीतिवचन 23 : 22

तेरा सोता धन्य रहे; और अपनी जवानी की पत्नी के साथ आनन्दित रह,

नीतिवचन 5 : 18

घर बुद्धि से बनता है, और समझ के द्वारा स्थिर होता है।

नीतिवचन 24 : 3

जो पुत्र अपने बाप को उजाड़ता, और अपनी मां को भगा देता है, वह अपमान और लज्जा का कारण होगा।

नीतिवचन 19 : 26

भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है। उस के पति के मन में उस के प्रति विश्वास है।

नीतिवचन 31 : 10

मैं तुझ को अपनी माता के घर ले चलती, और वह मुझ को सिखाती, और मैं तुझे मसाला मिला हुआ दाखमघु, और अपने अनारों का रस पिलाती।

श्रेष्ठगीत 8 : 2

जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है, वैस ही मैं भी तुम्हें शान्ति दुंगा; तुम को यरूशलेम ही में शान्ति मिलेगी।

यशायाह 66 : 13

क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता।

यशायाह 49 : 15